दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर चलाई गई थी पैलेट गन

Date: 2026-07-29
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दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर चलाई गई थी पैलेट गन

सीजेपी के संसद मार्च के दौरान हुआ था इस्तेमाल, 70 से ज्यादा शेल दागे गए

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र विरोध प्रदर्शन में उग्र हुई भीड़ पर काबू पाने के लिए दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर पैलेट गन चलाई गई थी। सीआरपीएफ की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने बांठिया के आदेश के बाद पैलेट गन के 70 से ज्यादा शेल दागे। इसके अलावा पांच टीयर स्मोक ग्रेनाइट, दंगारोधी गन 2 बीसी और प्लास्टिक पैलेट का इस्तेमाल भी किया गया था।

यह खुलासा दिल्ली पुलिस के दस्तावेज में हुआ है। हालांकि दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही है। जंतर-मंतर पर हुई हिंसक झड़प में आरएएफ द्वारा की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। पैलेट गन का इस्तेमाल करने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पैलेट गन को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा था कि एक शेल में 30 से 40 छर्रे होते हैं।

दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज में लिखा गया है कि 20 जुलाई की घटना के समय आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट सतीश सांगवान ड्यूटी पर थे। वे बी-208 की कमान संभाल रहे थे। उनके आदेशानुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगारोधी उपायों का इस्तेमाल किया गया था। दूसरे उपकरणों के साथ-साथ एंटी-रायट गन (एआरजी) का भी इस्तेमाल किया गया था।

नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने बतौर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आरएएफ के सहायक कमांडेंट दिलावर सिंह को लिखित में यह अधिकार दिया था कि वे गैर-कानूनी तरीके से एकत्रित हुई भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गैस, लाठीचार्ज व फायर आर्म्स का प्रयोग कर सकते हैं। एक अफसर ने माना कि छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ। 20 जुलाई को जब भीड़ काबू में नहीं आ रही थी, तब आरएएफ ने दंगारोधी उपकरणों का इस्तेमाल किया था। उस दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल भी किया गया।

राहुल गांधी ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।


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