“छत्तीसगढ़ के विधायक राघवेंद्र सिंह ने ताम्रपत्र की जानकारी पर विभाग से मांगी रिपोर्ट, भाषा ब्राह्मी-संस्कृत या ब्राह्मी-पाली"

"ताम्रपत्र पहले पांडुलिपि में नहीं आता था, लेकिन डा. अहमद खान ने 18 जनवरी 1987 को कृषकों से मल्हार का ताम्रपत्र प्राप्त किया था। उन्होंने रघुनंदन प्रसाद पांडे को दिया। उस समय यह पांडुलिपि में नहीं आया था,"

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