फ़ास्ट ट्रेक -न्याय में उलझनें बेशुमार

Date: 2026-07-29
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न्याय के इलाके में उलझनें बेशुमार

पेपर लीक आरोपियों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमों की वापसी जैसे सरकारी आश्वासनों की सफलता अदालती आदेशों पर निर्भर रहेगी

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को भी धन्यवाद दिया है। सीजेआई के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि यह ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है। इलेक्टोरल बॉन्ड्स मामले में डिजिटल पार्टी के गठन के साथ जजों के हवाले से कॉकरोच शब्द को वायरल किया जा रहा है। जजों की मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश करने के बढ़ते चलन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग वाले वीडियो की क्लिपिंग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है।

पेपर लीक आरोपियों के फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमों की वापसी जैसे सरकारी आश्वासनों की सफलता अदालती आदेशों पर निर्भर रहेगी। नीट से जुड़े पुराने मामलों की सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि पेपर लीक रोकने के कदमों की सुप्रीम कोर्ट निगरानी करेगा। जजों के अनुसार, प्रश्न-पत्रों को पहुंचाने में वायु सेना की मदद अस्थायी उपाय था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में गड़बड़ी खत्म करके संस्थागत सुधारों को लागू करना होगा।

राज्यों के बजाय केंद्रीय स्तर पर नीट परीक्षा के आयोजन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी। 2024 में पेपर लीक मामले के बाद उच्चस्तरीय समिति बनी थी, जिसकी अनेक सिफारिशें पर अभी तक अमल नहीं हुआ। परीक्षाओं के आयोजन और प्रश्नपत्रों की छपाई जैसे गोपनीय मामलों को निजी वेंडरों को आउटसोर्स किया जा रहा है। पिछले नौ वर्षों में एनटीए ने 270 परीक्षाएं आयोजित कर चुका है, लेकिन वहां कुल स्वीकृत 39 स्थायी पदों में 15 खाली हैं, 73 लोग संविदा पर और 124 कर्मचारी आउटसोर्सिंग से हैं। इनमें से 47 लोगों को सरकार ने हटाया, जिसे अस्थायी का नाम दिया जा रहा है।

नए आपराधिक कानूनों में संगठित अपराधियों के खिलाफ सख्त दंड और तीन साल के भीतर न्याय देने का प्रावधान पहले से है। 2024 में नीट पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार ने नया कानून बनाया था, जिसे सख्त बनाते हुए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं। तीसरा, सरकार ने अध्यादेश जारी करके सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों की नियुक्ति पहले कर दी और अब तीन साल से कानून पारित हो रहा है। जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र और वेतन भत्तों को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनेक आदेश दिए हैं, लेकिन हाईकोर्ट और जिला अदालतों में जजों के एक तिहाई रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कोई अभियान नहीं चल रहा।

संविधान और लोकतंत्र में जेन-जी के भरोसे को बनाए रखने के लिए न्यायिक तंत्र में जमीनी स्तर पर सुधार, बदलाव और जवाबदेही की जरूरत है।


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