पीएम मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए 6 सदस्यीय हाई पावर टास्क फोर्स बनाई
नई दिल्ली। परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान केंद्रित करेगी और भविष्य की सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने का काम इसकी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने रविवार रात सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर खुद इसकी जानकारी दी। इस टीम में स्पेस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और टेक से जुड़े दिग्गज शामिल हैं। पीएम ने कहा, हमारी परीक्षा पद्धति विश्वस्त हो, पारदर्शी हो, सबसे ज्यादा तकनीक का उपयोग हो, इसलिए विश्व प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क फोर्स बनाई है। हम सख्त कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमें भविष्य की ओर भी सोचना है।
टास्क फोर्स के सदस्य हैं—नंदन नीलेकणि, डॉ. एस. सोमनाथ (इसरो के पूर्व अध्यक्ष), तपन डेका (पूर्व डायरेक्टर, आईबी), वी. कामाकोटी (डायरेक्टर, आईआईटी मद्रास), अनीता करवाल (पूर्व सचिव, शिक्षा मंत्रालय) और अमृत लाल मीणा (लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट)।
नीलेकणि ने आधार और यूपीआई से ऐतिहासिक बदलाव लाए थे। वे 2009 में यूआईडीएआई के पहले अध्यक्ष रहे। आधार से सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने में बड़ी मदद मिली। ई-केवाईसी, ई-साइन, डिजिलॉकर और यूपीआई जैसे डिजिटल ढांचे ने देश में नई क्रांति की। इससे डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन पहचान सत्यापन और सरकारी व निजी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई। स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
पीएम मोदी ने चार दिनों में परीक्षा सुधारों पर तीसरा संदेश जारी किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही, फिर कानून सख्त बनाने वाले विधेयक की जानकारी दी। अब टास्क फोर्स के गठन की जानकारी भी वीडियो संदेश से दी। विक्रम-1 रॉकेट की सफलता पर पीएम ने कहा कि युवाओं ने जो कर दिखाया, वह कभी असंभव माना जाता था। हमारे युवाओं ने देश का मान बढ़ाया है।