चौथे साल टैक्स भरने में कंपनियों से आगे आम करदाता

Date: 2026-07-28
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चौथे साल टैक्स भरने में कंपनियों से आगे आम करदाता

देश की अर्थव्यवस्था में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। डायरेक्ट टैक्स के रुझान बदल रहे हैं। कंपनियों को 28 प्रतिशत तक रिफंड मिल रहा है, जबकि आम करदाताओं को महज 6 प्रतिशत ही रिफंड मिल पा रहा है। एनालिसिस के अनुसार पिछले चार साल से टैक्स भरने में कंपनियों से आम करदाता आगे निकल गए हैं।

वित्त वर्ष 2021-22 में कॉर्पोरेट टैक्स 7.12 लाख करोड़ और नॉन-कॉर्पोरेट 6.96 लाख करोड़ रुपये रहा। 2022-23 में कॉर्पोरेट 8.26 और नॉन-कॉर्पोरेट 8.33 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2023-24 में कॉर्पोरेट 9.11 और नॉन-कॉर्पोरेट 10.45 लाख करोड़ रुपये रहा। 2024-25 में कॉर्पोरेट 9.87 और नॉन-कॉर्पोरेट 12.35 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। 2025-26 में अब तक का रुझान भी इसी दिशा में है।

नेट टैक्स कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है। 2025-26 के लिए अनुमान 19.99 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में 13 जुलाई तक कॉर्पोरेट टैक्स 2.01 लाख करोड़ और नॉन-कॉर्पोरेट 3.85 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुका है। नॉन-कॉर्पोरेट में व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, फर्म और अन्य गैर-कंपनी करदाता शामिल हैं।

बाजार की गिरावट के बीच इक्विटी संग्रह 48 प्रतिशत उछला है। चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए डॉ. अमन शर्मा का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह कॉर्पोरेट टैक्स में उछाल अच्छा संकेत है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र की ओर बढ़ रही है। आंकड़ों में 16 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं। यह ट्रेंड अर्थव्यवस्था की मजबूती और कर आधार के विस्तार को दर्शाता है।


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