“छत्तीसगढ़ के विधायक राघवेंद्र सिंह ने ताम्रपत्र की जानकारी पर विभाग से मांगी रिपोर्ट, भाषा ब्राह्मी-संस्कृत या ब्राह्मी-पाली"

Date: 2026-07-18
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“छत्तीसगढ़ के विधायक राघवेंद्र सिंह ने ताम्रपत्र की जानकारी पर विभाग से मांगी रिपोर्ट, भाषा ब्राह्मी-संस्कृत या ब्राह्मी-पाली"

उन्होंने विधानसभा में कहा 

"ज्ञान भारतम अभियान के तहत क्या ताम्रपत्र भी पांडुलिपि के दायरे में आता है।"


जवाब में मंत्री ने जवाब दिया 


"ताम्रपत्र पहले पांडुलिपि में नहीं आता था, लेकिन डा. अहमद खान ने 18 जनवरी 1987 को कृषकों से मल्हार का ताम्रपत्र प्राप्त किया था। उन्होंने रघुनंदन प्रसाद पांडे को दिया। उस समय यह पांडुलिपि में नहीं आया था,"


"लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने पांडुलिपि की श्रेणी में स्वीकार किया। पीएम ने मन की बात में भी इसे कहा। "


फिर विधायक ने कहा 


"आपके जवाब में आया कि 2005 में प्रकाशित किया गया। 1987 में खोज हुई और ये ब्राह्मी लिपि व संस्कृत भाषा में है। जैसा कि उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री के ज्ञान भारतम में इसकी खोज हुई। ये ताम्रपत्र ब्राह्मी और"


"पाली भाषा में लिखी गई है। आपका जवाब और प्रधानमंत्री के ज्ञान भारतम से मिली जानकारी में अंतर है। विभाग गलत कह रहा है या ये जानकारी गलत है। "


मंत्री ने कहा 



"इस बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं जानकारी मंगाकर दूंगा। "


पुनः विधायक ने कहा 


"एटीआर का डॉक्यूमेंट के अनुसार ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा गया है ताम्रपत्र। विभाग ब्राह्मी और संस्कृत बता रहा है। तारीख भी गलत बताई जा रही है। 

"

पुनः मंत्री ने कहा 


"मैंने पहले ही कहा कि मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं। मैं परीक्षण करा लेता हूं। 

"


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