243 कॉलोनियां निगम और समितियों को दे रही 21 करोड़, फिर भी नालियां गंदी, सड़कों पर गड्ढे
बिलासपुर शहर की अधिकांश निजी कॉलोनियों के रहवासी इन दिनों दोहरी व्यवस्था का बोझ उठा रहे हैं। नगर निगम को रखरखाव शुल्क और अन्य कर देने के अलावा उन्हें अपनी कॉलोनी की समिति को अलग से मेंटेनेंस शुल्क भी देना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई कॉलोनियों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें बनी हुई हैं।
करीब दो साल पहले प्रशासन ने कॉलोनियों के हैंडओवर के नियम बदल दिए। उसके बाद नई कॉलोनियों का हैंडओवर नगर निगम की बजाय रहवासी समितियों को किया जाने लगा। शहर की 350 नई कॉलोनियों में से सिर्फ 107 कॉलोनियों का ही हैंडओवर हो सका है, जबकि 243 कॉलोनियां अभी भी निगम के अधीन नहीं आई हैं। इनमें नई और कुछ पुरानी कॉलोनियां भी शामिल हैं।
इन 243 कॉलोनियों से औसतन 200-200 रुपये मासिक शुल्क लेकर नगर निगम हर साल करीब 9.72 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में वसूल रहा है। वहीं कॉलोनी समितियां प्रति परिवार औसतन 200 रुपये मासिक मेंटेनेंस शुल्क लेकर सालाना करीब 11.66 करोड़ रुपये जुटाती हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 21 करोड़ रुपये वसूले जा रहे हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही।
गीतांजलि सिटी में स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं। सूरज विहार में जिम्मेदारी टालने का खेल चल रहा है। एकता कॉलोनी में सफाई नहीं होती। हनुमान नगर में बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है। रहवासी कहते हैं कि शुल्क तो समय पर लिया जाता है, लेकिन नाली साफ नहीं होती, गड्ढे नहीं भरे जाते और स्ट्रीट लाइट नहीं जलती। नगर निगम अधिकारी अनुप तिवारी का कहना है कि नए नियमों के तहत पूर्ण प्रमाण पत्र मिलने तक समिति ही रखरखाव की जिम्मेदार है।