बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि महज 0.3 प्रतिशत अंकों की कमी के आधार पर किसी बच्चे को शिक्षा के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रयास विद्यालय में प्रवेश से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए 59.7 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र के पक्ष में राहत दी है।
मामला अंबिकापुर निवासी 14 वर्षीय छात्र का है, जिसने प्रयास विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। प्रवेश के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक निर्धारित थे, जबकि छात्र के अंक 59.7 प्रतिशत रहे। इस मामूली अंतर के कारण उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया।
छात्र की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रवेश परीक्षा में छात्र ने 82 अंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित की है। अदालत ने माना कि केवल दशमलव अंकों के मामूली अंतर को आधार बनाकर किसी योग्य विद्यार्थी को अवसर से वंचित करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को छात्र के मामले पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम जरूरी हैं, लेकिन उनका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के अवसर से बाहर करना नहीं होना चाहिए। फैसले से ऐसे विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो मामूली अंकों के अंतर के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।