शिक्षा का अधिकार और जमीनी हकीकत: केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, सामूहिक भागीदारी से मिटेगा साक्षरता का अंतर

Date: 2026-09-22
news-banner

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट देश में शिक्षा और साक्षरता के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 14-18 वर्ष की आयु के लगभग दो करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं और कक्षा 3-8 के 11 फीसदी बच्चे कभी स्कूल नहीं गए। बिहार, नागालैंड, मेघालय और असम जैसे राज्यों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। इसके अतिरिक्त, देश के लगभग 7,993 स्कूलों में इस वर्ष एक भी नया दाखिला नहीं हुआ है।

साक्षरता में अंतर और इसके प्रमुख कारण नेशनल सैंपल सर्वे (2021) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें शहरी साक्षरता 90 प्रतिशत और ग्रामीण साक्षरता 77 प्रतिशत है। पुरुषों की साक्षरता दर (87.2%) की तुलना में महिलाओं की साक्षरता दर (74.6%) आज भी काफी कम है। गरीबी, सामाजिक-आर्थिक असमानता, लैंगिक भेदभाव और बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों की कमी इस असमानता के मुख्य कारण हैं।

समाधान और 'विकसित भारत 2047' का संकल्प साक्षरता बढ़ाने के लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। डिजिटल व वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने, मुफ्त पुस्तकालय स्थापित करने और समावेशी माहौल तैयार करने की दिशा में काम करना होगा। 'विकसित भारत 2047' के विजन के तहत शिक्षा मंत्रालय स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर रहा है।

Leave Your Comments