'व्यापमं' खत्म, अब 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल' करेगा तृतीय-चतुर्थ श्रेणी की भर्तियां
बिलासपुर | 23 अप्रैल 2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है। प्रदेश सरकार ने 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम' लागू कर दिया है। इसके साथ ही विवादों में रहे छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी 'व्यापमं' का अस्तित्व खत्म हो गया है। अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सभी पदों पर भर्तियां नया गठित 'छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल' करेगा। व्यापमं की सभी संपत्तियां, रिकॉर्ड और कर्मचारी अब नए मंडल के अधीन होंगे।
मंडल का गठन और उद्देश्य
इस मंडल का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में तकनीकी और गैर-तकनीकी तृतीय-चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता लाना है। मंडल न केवल सरकारी विभागों, बल्कि वैधानिक निकायों, मंडलों और प्राधिकरणों के लिए भी सीधी भर्ती की परीक्षा, साक्षात्कार और कौशल परीक्षण आयोजित करेगा। साथ ही व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी यही मंडल परीक्षाएं कराएगा।
प्रमुख सचिव स्तर के अफसर को कमान
मंडल के अध्यक्ष का पद प्रमुख सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपा जाएगा। मंडल में तीन सदस्य संयुक्त सचिव स्तर के और एक सचिव उप सचिव स्तर का शामिल होगा। परीक्षाओं की शुचिता के लिए विशेष परीक्षा नियंत्रक भी तैनात होगा। वरिष्ठ अधिकारी के अध्यक्ष होने से प्रश्नपत्रों की छपाई से वितरण तक गोपनीयता और सख्त होगी। जिलों के कलेक्टर और एसपी से समन्वय बेहतर कर 'जीरो एरर' परीक्षा का लक्ष्य रखा गया है।
क्या-क्या बदलेगा?
1. पुरानी परीक्षाएं: जिन परीक्षाओं के विज्ञापन अधिनियम लागू होने से पहले जारी हो चुके हैं, वे पुराने नियमों से ही पूरी होंगी।
2. नकल पर सख्ती: मंडल को परीक्षा में नकल या गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों पर सीधी कानूनी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।
3. पारदर्शिता: मंडल निधि का हर साल ऑडिट होगा। अब कई विभागों के लिए एक ही 'संयुक्त चयन परीक्षा' आयोजित की जा सकेगी।
सरकार का दावा है कि नए नियम से भर्ती प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त होगी। एक ही छत के नीचे सभी भर्तियां होने से युवाओं को बार-बार फॉर्म भरने से राहत मिलेगी।