टेस्ट ट्यूब बेबी और IVF की आड़ में तस्करी

Date: 2026-05-27
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टेस्ट ट्यूब बेबी या IVF की आड़ में तस्करी: बच्चियों के अंडाणु 25 हजार में खरीद रहे दलाल, डॉक्टर ने प्रीमियर डोनर्स के फोटो भेजे, 12 लाख मांगे

छत्तीसगढ़ बिलासपुर, : टेस्ट ट्यूब बेबी और आईवीएफ (IVF) ट्रीटमेंट की आड़ में अंडाणु (ओवम) की तस्करी का बड़ा रैकेट सक्रिय है। दलाल युवतियों के अंडाणु मात्र 25 हजार रुपये में खरीद रहे हैं, जबकि प्रीमियम डोनर्स के लिए डॉक्टर 12 लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं।

जांच के दौरान पता चला कि एक डॉक्टर ने अंडाणु डोनर्स की तस्वीरें भेजते हुए प्रीमियम कैटेगरी की बच्चियों की जानकारी साझा की। इनमें 20 से 25 वर्षीय स्वस्थ, सुंदर और शिक्षित युवतियों को शामिल किया गया था। दलालों का नेटवर्क छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों तक फैला हुआ है। दलाल युवतियों को आर्थिक लालच देकर संपर्क करते हैं। उन्हें 20-25 हजार रुपये की राशि का लालच दिया जाता है, जबकि असल में ये अंडाण बड़े शहरों के महंगे IVF सेंटर्स में लाखों रुपये में बेचे जा रहे हैं।

एक दलाल ने जांच टीम को बताया कि “प्रीमियर डोनर्स” की फीस 8 से 12 लाख रुपये तक हो सकती है। इनमें ऊंची जाति, अच्छी लुक, उच्च शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य वाली लड़कियों को प्राथमिकता दी जाती है। डॉक्टर और दलाल मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं ताकि कानूनी पेचीदगियों से बचा जा सके।

महिलाओं के अंडाणु निकालने की प्रक्रिया जोखिम भरी होती है। हार्मोन इंजेक्शन से ओवरी को अत्यधिक उत्तेजित किया जाता है, जिससे कई स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। कई लड़कियां इस प्रक्रिया के बाद गंभीर समस्याओं का शिकार हो रही हैं, लेकिन दलाल उन्हें कोई मेडिकल फॉलोअप नहीं देते।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में 9 से 10 दलालों और कुछ डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसे रैकेट में शामिल लोगों पर मानव तस्करी और मेडिकल एथिक्स उल्लंघन के गंभीर मामले दर्ज किए जाएंगे।

यह मामला टेस्ट ट्यूब और IVF क्लिनिकों में हो रही अनैतिक प्रथाओं और गरीब-मध्यम वर्ग की युवतियों का शोषण उजागर करता है। आमजन को सतर्क रहने और ऐसी गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। 


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