मोबाईल ऐप से महिला जनप्रतिनिधियों के बदले काम करने वाले पुरुषों पर कसेगा शिकंजा
पंचायतों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके परिजन या अन्य पुरुषों द्वारा कामकाज संभालने की शिकायतें लंबे समय से मिलती रही हैं। अब इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए पंचायत विभाग डिजिटल निगरानी का सहारा ले रहा है। विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने बताया कि एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्यस्थल पर वास्तविक रूप से वही महिला जनप्रतिनिधि मौजूद हों, जिन्हें जनता ने चुना है।
नई व्यवस्था के तहत बैठकों, निरीक्षणों और योजनाओं की मॉनिटरिंग ऐप पर दर्ज होगी। उपस्थिति, लोकेशन टैग और समय-चिह्नित फोटो अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। इससे फर्जी प्रतिनिधित्व पर अंकुश लगेगा और महिलाओं की वास्तविक भागीदारी बढ़ेगी। विभाग का मानना है कि कई जगह पुरुष रिश्तेदार निर्णय लेते हैं, जबकि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि औपचारिक रूप से पद पर रहती हैं—यह लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।
ऐप के जरिए प्रशिक्षण मॉड्यूल, दिशा-निर्देश और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी उपलब्ध होगी, जिससे जनप्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता को देखते हुए ऑफलाइन डेटा कैप्चर और बाद में सिंक की सुविधा भी दी जा रही है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पहल महिलाओं को सशक्त बनाने और पंचायत शासन को प्रभावी करने की दिशा में बड़ा कदम है। उम्मीद है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद महिला जनप्रतिनिधि स्वयं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगी और पंचायत स्तर पर सुशासन को मजबूती मिलेगी।