डिजिटल युग में नया कदम: अब सोशल मीडिया और क्रिप्टो निवेश का भी होगा वारिस, केंद्र ला रहा डिजिटल वसीयत कानून
नई दिल्ली: डिजिटल युग में लोगों की कमाई और संपत्ति का स्वरूप बदल गया है। अब जमीन-जायदाद के साथ डिजिटल गोल्ड, क्रिप्टोकरेंसी, सोशल मीडिया अकाउंट और क्लाउड स्टोरेज भी बड़ी संपत्ति बन गए हैं। लेकिन व्यक्ति की मृत्यु के बाद इन डिजिटल एसेट्स तक पहुंच न होने से परिजनों को भारी परेशानी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है। इसके तहत निवेश और सोशल मीडिया एक्सेस के लिए डिजिटल एसेट्स को कानूनी वारिस मिल सकेगा।
क्या है डिजिटल वसीयत?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय इस कानून का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। नए नियम से डिजिटल वसीयत का रास्ता खुलेगा। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल गोल्ड, क्रिप्टोकरेंसी, लैपटॉप-कंप्यूटर एक्सेस और क्लाउड स्टोरेज को शामिल किया जाएगा। युवा पीढ़ी इन्वेस्टमेंट्स से लेकर सोशल मीडिया से कमाई कर रही है, इसलिए इनकी वसीयत जरूरी हो गई है। डिजिटल वसीयत की प्रक्रिया सामान्य वसीयत जैसी ही होगी, ताकि वारिस को एक्सेस आसानी से मिल सके।
प्लेटफॉर्म्स पर पहले से सुविधा
कुछ डिजिटल कंपनियां पहले से ही यह विकल्प दे रही हैं। गूगल ने 'इनएक्टिव अकाउंट मैनेजर' दिया है, जिससे आप पहले से तय कर सकते हैं कि अकाउंट इनएक्टिव होने पर एक्सेस किसे मिलेगा। फेसबुक 'लिगेसी कॉन्टैक्ट' का ऑप्शन देता है। एपल भी डिजिटल लिगेसी के जरिए क्लाउड स्टोरेज का एक्सेस दूसरे को देने की सुविधा देता है।
क्यों जरूरी है कानून?
साइबर क्राइम विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार, अभी आईटी अधिनियम डिजिटल संपत्तियों पर लागू नहीं होता। नया कानून उन लोगों को प्रभावी समाधान देगा जो भारी मात्रा में डेटा और डिजिटल संपत्तियां रखते हैं। सरकार कानून में प्लेटफॉर्म कंपनियों को भी शामिल कर सकती है, ताकि मृत्यु के बाद अपनों को हक पाने के लिए भटकना न पड़े।