भारत माला मुआवजा घोटाला

Date: 2026-05-27
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भारत माला मुआवजा घोटाला: नेताओं, आईएएस और पूर्व कलेक्टरों की भूमिका की जांच में ईडी

रायपुर।  राज्य में निर्माणाधीन भारतमाला परियोजना के मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच तेज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस और भाजपा से जुड़े कुछ विधायकों, कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और छह पूर्व कलेक्टरों की भूमिका की पड़ताल कर रहा है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जिन इलाकों से परियोजना गुजर रही थी, वहां प्रभावशाली लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदकर बाद में उसी जमीन का मुआवजा लिया।

मामले में पटवारियों और राजस्व अधिकारियों द्वारा फाइल तैयार कर कलेक्टर कार्यालय से अनुमोदन कराने के बाद मुआवजा जारी होने की बात सामने आई है। ईडी ने 27 अप्रैल को कुछ ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज जुटाए, जिनसे नेताओं और अधिकारियों के बीच संभावित कड़ियां जुड़ने के संकेत मिले हैं। कुछ प्रॉपर्टी डीलरों और बिचौलियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ईडी के दावे के मुताबिक, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। इस प्रकरण में पूर्व एसडीएम सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। रायपुर के बाद कोरबा जिले में सबसे अधिक गड़बड़ी सामने आई, जहां मुआवजा वितरण में अनियमितताएं पाई गईं। एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या किसी स्तर पर कमीशनखोरी हुई।

जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और संपत्ति विवरण खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर अंतिम चालान पेश किया जाएगा। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।


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