नोएडा का सेक्टर-156 स्थित ये रोबोट कारखाना 50 एकड़ में फैला हुआ है। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्लांट पूरी तरह तैयार है। जहाँ हर साल 1 लाख रोबोट्स बनाए जाएंगे।
रोबोट्स की माँग तेजी से बढ़ रही है। दुनिया भर में ऑटोमेशन, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और डिफेंस के क्षेत्र में इनकी जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। इस फैक्ट्री में हर तरह के रोबोट्स तैयार किए जा रहे हैं – इंडस्ट्रियल आर्म्स, सर्विस रोबोट्स, ह्यूमनॉइड्स और स्पेशल टास्क रोबोट्स।
कैसे-कैसे रोबोट बन रहे हैं यहाँ?
- पहला क्लासिक इंडस्ट्रियल रोबोट: जो फैक्ट्री में भारी कामों के लिए इस्तेमाल होगा।
- एंटीसेप्टिक वॉशिंग रोबोट: अस्पतालों के लिए खास, जो खुद बैक्टीरिया से लड़ता है।
- ह्यूमनॉइड रोबोट: जो इंसानों जैसा दिखता है और बातचीत भी कर सकता है।
- रेड रोबोट आर्मी: छोटे-छोटे रोबोट्स जो मिलकर बड़ी टीम बनाकर काम करते हैं।
भारत का लक्ष्य
सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर भारत को ग्लोबल रोबोटिक्स हब बनाने पर जोर दे रहे हैं। आने वाले 5-7 सालों में भारत दुनिया के टॉप 5 रोबोट उत्पादक देशों में शामिल हो सकता है।
एक छत के नीचे 22 लाख के रोबोट
सुपरमैन बनाते हैं कि भविष्य में हर छोटे-छोटे काम के लिए भी रोबोट इस्तेमाल किए जाएंगे। अमेरिका और चीन के बाद अब भारत भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वर्ष 2012 में मात्र 10 हजार रोबोट्स भारत में थे, जो अब बढ़कर 3 लाख 43 हजार हो चुके हैं। यानी पिछले 14 साल में रोबोट्स की संख्या में भारी उछाल आया है।
भारत में हर साल औसतन 22 हजार नए रोबोट्स जोड़े जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर रोबोट ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल कंपनियों में काम कर रहे हैं।
60% रोबोट्स महाराष्ट्र में
देश में सबसे ज्यादा रोबोट्स महाराष्ट्र में लगाए गए हैं। उसके बाद तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक का नंबर आता है।
300 करोड़, 1,150 कंपनियाँ
भारत में वर्तमान में 300 से ज्यादा रोबोटिक्स कंपनियाँ काम कर रही हैं। इनमें से कई स्टार्टअप्स भी शामिल हैं। इन कंपनियों ने मिलकर अब तक 1,150 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
कीमत पर 25% बचत
एक छोटे रोबोट की औसत कीमत 22 लाख रुपये है। लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ने और लोकल कंपोनेंट्स इस्तेमाल करने से इसकी कीमत में 25% तक की बचत हो सकती है।