एक चील का अंडा मुर्गी के घोंसले में गिर जाता है। मुर्गी उसे अपने अंडों के साथ सेती है। चील का बच्चा मुर्गी के बच्चों के साथ बड़ा होता है। वह खुद को मुर्गी ही समझता है — जमीन पर घूमता, दाना चुगता, कम उड़ने की कोशिश भी नहीं करता।
जब वह ऊपर उड़ते चील को देखता है और पूछता है कि “वो कौन है जो इतना ऊँचा उड़ रहा है?”, तो मुर्गी कहती है — “वो चील है, आकाश की रानी।” लेकिन चील का बच्चा विश्वास नहीं करता और कहता है, “हम तो मुर्गियाँ हैं, हम कभी नहीं उड़ सकते।”
मुख्य शिक्षा (Moral):
“तुम्हारा जन्म कहाँ हुआ या तुम्हें किस परिवेश में पाला गया, यह तय नहीं करता कि तुम कौन हो। तुम्हारी असली पहचान तुम्हारी क्षमता में छिपी है।”
• अगर तुम चील हो, तो मुर्गियों के बीच रहकर भी तुम्हें मुर्गी नहीं बनना चाहिए।
• अपनी असली क्षमता को पहचानो और उसको नकारो मत।
• लोग तुम्हें जितना भी नीचा दिखाएँ या सीमित करें, तुम्हें अपनी ऊँचाई खुद तय करनी है।
• सपनों और क्षमता के हिसाब से जीओ, न कि परिस्थितियों के हिसाब से।
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