आदित्य धर का ‘धुरंधर’ सत्यजीत रे की ‘देवी’ पर भारी? नेटिजन्स की प्रतिक्रिया

Date: 2026-07-11
news-banner

आदित्य धर का ‘धुरंधर’ सत्यजीत रे की ‘देवी’ पर भारी? नेटिजन्स की प्रतिक्रिया

हैदराबाद: सत्यजीत रे की पुरानी क्लिप दोबारा वायरल हो रही है, जिसमें महान फिल्मकार अपनी फिल्म ‘देवी’ पर बात कर रहे हैं। ‘देवी’ अंधविश्वास, धार्मिक कट्टरता और अंधभक्ति के खतरों पर सवाल उठाती फिल्म है। रे ने कहा था कि दर्शक उनकी फिल्म को अपेक्षा के मुताबिक नहीं समझ पाए क्योंकि उस समय का बड़ा हिस्सा सिनेमा को समझने में अभी भी ‘पिछड़ा’ और ‘अपरिपक्व’ था। वे व्यावसायिक फिल्मों के चंगुल में फंसे थे, जबकि रे के लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कला, कविता, विचार और समाज का दर्पण था।b490c2

लेकिन दशकों बाद इस क्लिप पर नेटिजन्स की प्रतिक्रिया ने विवाद खड़ा कर दिया। फिल्म प्रेमी चौंक गए जब कुछ यूजर्स ने सत्यजीत रे की तुलना निर्देशक आदित्य धर से करने लगे। एक कमेंट में लिखा गया, “अभी भी आदित्य धर 500 सत्यजीत रे को नाश्ते में खा सकते हैं।” दूसरे ने कहा, “सत्यजीत रे आदित्य धर के सामने कौन हैं?”

सत्यजीत रे की फिल्में मौन, यथार्थवाद, मानवीय भावनाओं और सामाजिक सवालों पर टिकी थीं। उनकी रचनाएं बिना जोरदार संगीत या नारे के दर्शकों के मन में बस जाती थीं। वहीं आदित्य धर (‘उरी’, ‘धुरंधर’) की फिल्मों को कई आलोचक राष्ट्रवाद और सत्ता के पक्ष में प्रोपगैंडा स्टाइल का मानते हैं।

यह तुलना न सिर्फ अनुचित बल्कि हास्यास्पद बताई जा रही है। रे समाज को सवाल करते थे, जबकि धर की सिनेमा कई बार उसी व्यवस्था को मजबूत करती दिखती है जिसकी जांच रे करते।

धर की सफलता और उनके दर्शकों का अपना महत्व है, लेकिन सोशल मीडिया पर फैन वॉर्स ने सिनेमा चर्चा को शोर में बदल दिया है। रे की ‘देवी’ आज भी प्रासंगिक है—यह अंधभक्ति और सत्ता पर सवाल का प्रतीक है। क्लिप के कमेंट सेक्सन ने अंततः रे की बात को ही साबित कर दिया।


Leave Your Comments