रायपुर:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सामाजिक न्याय, समान अवसर और आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की पुरजोर मांग को लेकर 'जेन-जी युवा वर्ग, छत्तीसगढ़' के बैनर तले एक ऐतिहासिक 'संवैधानिक आरक्षण बचाओ रैली' का भव्य आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस महारैली में प्रदेश भर के विभिन्न दूर-दराज जिलों से आए 10 हजार से भी अधिक युवाओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर हिस्सा लिया।
अंबेडकर चौक से उठी अधिकारों की आवाज
रैली की शुरुआत राजधानी के ऐतिहासिक अंबेडकर चौक से हुई, जहाँ से हजारों की संख्या में एकजुट होकर युवाओं ने जुलूस निकाला। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सामाजिक न्याय और अपने संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। रैली के शांतिपूर्ण समापन के बाद प्रतिनिधियों ने राज्यपाल के नाम एक विस्तृत 20 सूत्रीय ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन सौंपने के साथ ही युवा नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा उनकी जायज मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में पूरे राज्य में एक व्यापक 'राज्यव्यापी जनजागरण अभियान' छेड़ा जाएगा।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें और मुद्दे:
पदोन्नति और रोस्टर नियम: ज्ञापन में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग प्रमुखता से रखी गई। एससी-एसटी वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण नियम-5 को पुनः अधिसूचित करने, सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के अनुरूप आरक्षण देने तथा बिना रोस्टर पदोन्नति पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। साथ ही 1994 के छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम और 1998 के आरक्षण नियमों के तहत रोस्टर को नियमित रूप से अपडेट करने पर बल दिया गया।
आरक्षण प्रतिशत व भर्ती प्रक्रिया: रैली में राज्य गठन से लेकर अब तक के सभी बैकलॉग पदों की जानकारी सार्वजनिक करने और उनके लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की जोरदार मांग उठी। इसके अलावा, ओबीसी वर्ग को 27% और एससी वर्ग को 13% आरक्षण देने तथा प्लेसमेंट, आउटसोर्सिंग एवं संविदा भर्तियों में भी आरक्षण व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने का आग्रह किया गया।
सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व: युवाओं ने पेसा (PESA) कानून और वन अधिकार अधिनियम का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा ग्राम सभाओं को अधिक सशक्त बनाने की बात कही। इसके साथ ही, छात्रवृत्ति में वृद्धि, उसका समय पर भुगतान, शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय सुरक्षा तंत्र स्थापित करने और शासन-प्रशासन में सभी आरक्षित वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल रही।