शिक्षक सम्मान समारोह: पचपेड़ी महाविद्यालय में शिक्षकों की सेवाओं का हुआ वंदन, छात्रों की रंगारंग प्रस्तुतियाँ

Date: 2026-09-18
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संत गुरु घासीदास कला, विज्ञान एवं शिक्षा महाविद्यालय, पचपेड़ी में शिक्षक सम्मान समारोह 2026 का आयोजन महाविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, सावित्रीबाई फुले एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पी.सी. जायसी महाप्रबंधन समिति अध्यक्ष, जे.के. पाटले महाप्रबंधन समिति सचिव एवं डॉ. दुर्गा बाजपेयी प्राचार्य, पातालेश्वर महाविद्यालय मस्तूरी उपस्थित रहे।

अतिथिगण में नरेश कुमार पैकरा प्राचार्य, शिवनाथ उ.मा.वि. कुकुर्दीकला, सुनील भारद्वाज व्याख्याता, जोंधरा, अनिल कुमार साहू प्राचार्य, मस्तूरी, संजीव मिरी व्याख्याता, मस्तूरी, महेत्तरु मधुकर प्रधान पाठक, कन्या ध्रुवाकारी, राहुल भारद्वाज सीएससी, आर.के. डहरिया प्राचार्य, सेजेस पचपेड़ी, डॉ. धनंजय पाण्डेय प्राचार्य, सोन, गोविन्द प्रसाद साहू व्याख्याता, सुरेश पटेल तक्षशिला प्राचार्य, जोंधरा, झक्र प्राचार्य, डी.के. कुर्रे प्राचार्य कन्या पचपेड़ी, शासकीय उ.मा.वि. पचपेड़ी, काशीराम रजक प्राचार्य, बुढ़ीखार, रूपेन्द्र सिंह महिलांगे व्याख्याता, बुढ़ीखार, कल्पना टण्डन व्याख्याता, बुढ़ीखार एवं गुसा ओखर प्राचार्य मंचस्थ रहे।

मुख्य अतिथियों का उद्बोधन डॉ. पी.सी. जायसी ने कहा शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि संस्कार और चरित्र का निर्माण करता है। संत गुरु घासीदास जी की धरती पर शिक्षा से सेवा का जो संकल्प इस महाविद्यालय ने लिया है, वह सराहनीय है। जे.के. पाटले ने कहा शिक्षित बनो, संगठित बनो, संघर्ष करो का मूलमंत्र आज भी प्रासंगिक है। शिक्षकों का सम्मान समाज का सम्मान है। डॉ. दुर्गा बाजपेयी ने कहा परंपरा भारत की पहचान है। नारी शिक्षा समाज की प्रगति की कुंजी है, इसे सावित्रीबाई फुले ने सिद्ध किया।

समारोह में पचपेड़ी परिक्षेत्र के उत्कृष्ट शिक्षकों का शॉल, श्रीफल एवं मोमेंटो देकर सम्मान किया गया। विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं शिक्षा पर परिचर्चा प्रस्तुत की गई।

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